प्रीत की रीत ऐसी,
प्रीत की रीत ऐसी,
जो बेरंग में भी रंग भर दे।
वैर की रीत ऐसी,
जो हर रंग को भी बेरंग कर दे।
जल की प्रीति देखो,
दूध संग मिलकर दूध ही हो जाए।
पर जब देखा वैर खटाई का
तब न दूध बचे,न ही जल की कोई पहचान रहे॥
वन्दना सूद