कुंडलिया
कुंडलिया
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शोभामय लगता बहुत, कोई नहीं जवाब।
जहां कहीं भी हो रखा, सुन्दर पुष्प गुलाब।
सुन्दर पुष्प गुलाब, सभी के मन को भाए।
सुप्त हृदय में स्नेह, भावना मधुर जगाए।
कहते वैद्य सुरेन्द्र, नहीं कोई भी विस्मय।
देता शुभ संदेश, गुलाब सुर्ख शोभामय।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य