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22 Nov 2025 · 1 min read

बाहर इतना शोर-शराबा रहता है

बाहर इतना शोर-शराबा रहता है
अंदर सन्नाटे का दरिया बहता है

पहले पंछी तड़पा था चिल्लाया था
अब पिजरे में गुमसुम बैठा रहता है

घोड़ा ढाई घर चल के इतराता है
प्यादा गुपचुप आगे बढ़ता रहता है

मेरी तन्हा रातों का जो है साथी
दूर गगन में एक सितारा रहता है

फूस का छप्पर इक झोंके में ढह जाए
राजमहल भी ढहते-ढहते ढहता है

मुस्काने जो चेहरे पर हैं झूठी हैं
सच तो आँखों का पानी ही कहता है

चाँद तो दुनिया की नज़रों में हीरा है
उसकी हरकत सिर्फ सितारा सहता है

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