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22 Nov 2025 · 1 min read

*पहेलियांँ* -

पहेलियांँ

1-सूरज संग मैं आती हूँ,
सूरज संग ही छिप जाती हूँ ।
ग्रीष्म ऋतु में सब घबराते ,
शीत ऋतु में गले लगाते ।

2-गन्ने से हैं मुझे बनाते ,
पर चीनी नहीं हूँ ।
मीठा मेरा स्वाद है,
मगर पकवान नहीं हूंँ ।

3-गुड़ और तिल से मुझे बनाते,
सब मिलकर मजे से खाते ।
जाड़ों का मिष्ठान हूँ न्यारा
नाम भी मेरा बहुत प्यारा ।

4-रोज रात को आता हूंँ,
अमावस को छिप जाता हूँ ।
नाम मेरे बहुत ही सारे
तुमको कौन सा भाये प्यारे ।

5-टिम-टिम टिमटिमाते
रोज रात में आ जाते ।
कोई इनको गिन नहीं पाये ,
देख देख मन है हर्षाये ।

मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश

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