सीखो दुःख भूलना
एक अवसर मिले जब
दुखों को चुन लेना तब
दुखों को इकट्ठा करना
एक पोटली में भरना
फ़िर घर से निकलना
पोटली साथ रखना
थकने तक चलते रहना
लौटने का नहीं सोचना
चलते चलते इतनी दूर आ गए हो
ज़ाहिर सी बात है कि थक गए हो
ज़िंदगी का बोझ अब उठाया नहीं जा रहा है
अब ग़मो को और छुपाया नहीं जा रहा है
बस अब यहीं ठहरना
इससे आगे नहीं बढ़ना
यह ठहराव नहीं है मात्र
यही सत्य है एकमात्र
इस सत्य को स्वीकार करना
जीवन में अब आगे बढ़ना
सत्य से मत भागना
कायर बन मत जाना
बोझ ज़िंदगी का हंसकर उठाना
संघर्ष से हार अभी मत जाना
अंधकारमय जीवन में
रौशनी है अभी भरना
फूलों सा महकना
सूरज जैसे जलना
तारे बन आकाश में
टिमटिमाते रहना
_ सोनम पुनीत दुबे