पवन-पुत्र तेरे शरण, आया तेरा दास।
पवन-पुत्र तेरे शरण, आया तेरा दास।
कृपा दृष्टि तेरी मिले, लेकर यह विश्वास।।
राघव के प्रिय भ्रात सम, रहते तुम हिय पास।
राम चरण रज दे मुझे, मेरी इतनी आस।।
राम दुलारे हो प्रकट, विनय करे यह दास।
विपदा सारी दूर कर, भर दो कुछ उल्लास।।
अभय दान दे दो हमें, आकर मेरे पास।
निर्भयता से कर सकूँ, सुंदर कारज खास।।
दर्शन देंगे आप यह, “पाठक” का विश्वास।
कार्य सभी होगा सुफल, देने वर यह खास।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)