हसीनाओं से लगाकर दिल
हसीनाओं से लगाकर दिल, जिंदगी को मत बर्बाद करो।
खिलौना हसीनाओं का बनने से, नहीं हो सकोगे आबाद।।
हसीनाओं से लगाकर दिल———————-।।
जरूरी नहीं ये हसीं मुखड़े, रहेंगे कल को भी वफ़ा तुमसे।
तुमको प्यार है इनसे जितना, क्या इनको प्यार है इतना तुमसे।।
करके खिदमत तुम इनकी ऐसे, नहीं हो सकोगे इनसे आज़ाद।
हसीनाओं से लगाकर दिल———————-।।
संभालो तुम खुद को जरा, सँवारो जरा तुम खुद को।
मत खुद को करो इनपे बदनाम, जीवो इज्जत से उठाकर सिर को।
इनसे मतलब तुम कुछ भी रखो नहीं, वरना बच नहीं सकेगा तुम्हारा ताज।
हसीनाओं से लगाकर दिल———————।।
क्या है कमी आखिर तुझमें, और क्या कर सकते नहीं।
झुका सकते हो तुम जमाने को, असफल तुम कभी हो सकते नहीं।।
यह आदत अगर तुमने छोड़ी नहीं, हो नहीं सकोगे तुम कभी कामयाब।
हसीनाओं से लगाकर दिल———————-।।
नहीं मानों तुम इनको अपना नसीब, तुम्हारा जब इनको नहीं ख्याल।
जिंदगी का सपना इनको मानो नहीं, ये जब तुम्हारा पूछते नहीं हाल।।
तुम इनसे हटा लो ध्यान अपना, वरना होगा नहीं तुम्हारा सुनाम।
हसीनाओं से लगाकर दिल———————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)