लोग ख़ुदको ख़ुदा समझते हैं (ग़ज़ल)
ख़ुदको सबसे बड़ा समझते हैं
लोग ख़ुदको ख़ुदा समझते हैं
एक भी काम वो नहीं करते
ख़ुदको सबसे जुदा समझते हैं
एक वो ही यहाँ सयाने हैं
वो सभी को गधा समझते हैं
बात मुँह पे जो बोल देता है
सब उसीको बुरा समझते हैं
बे-हयाई गुनाह है लेकिन
कुछ तो इसको अदा समझते हैं
– जॉनी अहमद ‘क़ैस’