ऐ चांद, तेरा दीदार भी सुकून देता है,
ऐ चांद, तेरा दीदार भी सुकून देता है,
थका मन जैसे फिर उड़ना चाहता है,
तेरी चांदनी हर दर्द को बहा ले जाती है,
और ये रात मुझे अपने दामन में समेट लेती है।
©® डा० निधि श्रीवास्तव “सरोद”
ऐ चांद, तेरा दीदार भी सुकून देता है,
थका मन जैसे फिर उड़ना चाहता है,
तेरी चांदनी हर दर्द को बहा ले जाती है,
और ये रात मुझे अपने दामन में समेट लेती है।
©® डा० निधि श्रीवास्तव “सरोद”