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21 Nov 2025 · 1 min read

जब सितारे हैं चमकते , नज़्र आते लोग हैं

ग़ज़ल …

जब सितारे हैं चमकते , नज़्र आते लोग हैं ,
भीड़ में मायूसियों की , डर से खोते लोग हैं ।

देखना कमज़ोर को जब ,मत उड़ाना तुम हँसी,
दरबदर होकर, कभी मंज़िल को पाते लोग हैं ।

घूमते फिरते कहीं भी , हाथ होता हाथ में ,
फिर जुदा होकर कभी, कांधों पे जाते लोग हैं।

हादसा गुज़रा ,भटकता फिर रहा है ,हर बशर,
इक अकेला बच गया,बाक़ी जो मरते, लोग हैं।

इक हवा आई, मिटा कर कारवां चलती बनी ,
“नील” बिछड़े लोग का,अफ़सोस करते लोग हैं ।

✍️ नीलोफर ख़ान नील रूहानी…

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