उठो लाल
छिपे गगन में चाँद सितारे
उठो लाल अब प्यारे प्यारे
अंधियारों को दूर भगाने
आए नभ में सूर्य हमारे
चहक रही हैं चिड़ियाँ ची ची
करके शोर खुशी में मारे
हुआ धरा का रूप सुनहरा
फूलों से हैं भरे पिटारे
छोड़ो बिस्तर जागो जागो
आलस को अब करो किनारे
स्कूल समय से जाना तुमको
काम सुबह के कर लो सारे
करो बड़ों को नमन “अर्चना’
खोलो खोलो सुख के द्वारे
20.11.2025
डॉ अर्चना गुप्ता