किसी को जब कोई दिल से चाहता है
किसी को जब कोई दिल से चाहता है।
प्यार सच्चा जब किसी से होता है।।
वह रहता है गुम अक्सर उसके ख्यालों में।
वह खत रोज उसको ऐसे लिखता है।।
किसी को जब कोई —————-।।
अजीब क्यों लगता है तुमको, मेरा यह खत पढ़कर।
यकीन क्यों नहीं होता है मुझपे, मेरा यह गीत सुनकर।।
किसी की बेवजहां तारीफ कोई नहीं करता है।
वह रोज खत क्यों ऐसे उसको लिखता है।।
किसी को जब कोई ———————।।
गुस्सा क्यों आता है मुझपे, मेरी ये बातें सुनकर।
मुझे क्या अच्छा नहीं लगता, पूछा कभी मुझसे आकर।।
ऐसे अपना लहू कोई कभी नहीं बहाता है।
क्यों लहू से उसकी ऐसे तस्वीर बनाता है।।
किसी को जब कोई ——————।।
किसी के लिए वह शौक अपने बदल लेता है।
किसी के लिए वह ऐसे सजता और संवरता है।।
किसी पर क्यों अपना सब कुर्बान वह करता है।
बार बार क्यों उसको वह पैगाम लिखता है।।
किसी को जब कोई ———————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)