भूलो नहीं अतीत
भूलो नहीं अतीत
ये वक्त बदलता रहता है,
भूलो नहीं अतीत।
बीज विनाशी अहंकार में,
होता यहीं प्रतीत।।
कल जो था वह आज नहीं अब,
समय रहा है बीत।
आज बदल हो जाता है कल,
यहीं जगत् की रीत।।
सतरंगी दुनिया को देखा,
सात सुरों संगीत।
अग-जग सुंदर लगता है तब,
हृदय भरा हो प्रीत।।
वर्तमान को अगर समझना,
पहले समझ अतीत।
तभी भविष्य सँवर पाएगा,
होगी फिर से जीत।।
__अशोक झा ‘दुलार’