*कितना समय मिला है जग में, जीने का अनुमान करो (मुक्तक)*
कितना समय मिला है जग में, जीने का अनुमान करो (मुक्तक)
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कितना समय मिला है जग में, जीने का अनुमान करो
जो धन है अतिरिक्त पास में, उसका हर क्षण दान करो
याद रखो सब प्रभु की माया, जगत् स्वप्नवत ही जानो
खुद को बड़ा समझ कर हरगिज, मन में मत अभिमान करो
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451