हम मन में मन - भर भार लिए चलते हैं,
हम मन में मन – भर भार लिए चलते हैं,
नित चिंतन का व्यापार लिए चलते हैं।
बाहर तो हम झिलमिल झिलमिल हँसते हैं,
किन्तु दुःख का अंबार लिए चलते हैं।
© ऋतुपर्ण
#अंतर्राष्ट्रीय_पुरुष_दिवस
हम मन में मन – भर भार लिए चलते हैं,
नित चिंतन का व्यापार लिए चलते हैं।
बाहर तो हम झिलमिल झिलमिल हँसते हैं,
किन्तु दुःख का अंबार लिए चलते हैं।
© ऋतुपर्ण
#अंतर्राष्ट्रीय_पुरुष_दिवस