: मनचाहा किसको मिला
: मनचाहा किसको मिला
विधा : दोहे
१. मनचाहा किसको मिला ,घूम देख संसार।
कहीं न कोई कह रहा ,मुझे मिला सब यार।।
२. सुख मिलता संतोष से, बने रहो गंभीर।
मन चाहा किसको मिला, क्यों नैनों में नीर।।
३. मन चाहा किसको मिला, सबके मन कुछ आह।
जितना हीं है मिल सका, बोल बहुत है वाह!!
४. कर्म करो सामर्थ्य भर, बिना मीन अरु मेख।
मन चाहा किसको मिला, आँख खोल कर देख।।
५. कोशिश हम करते रहें, कभी न मानें हार।
हर कठिनाई पार कर, टूट जुड़े हर बार।।
__ अशोक झा ‘दुलार’
मधुबनी (बिहार)
“रचना स्वरचित एवं मौलिक है/”