जो करता नित काम
उसकी बिगड़ी तुरत बनाते, हैं मेरे प्रभु राम।
राम नाम का सुमिरन करके, जो करता नित काम।।
राम नाम अनमोल बड़ा है,मन मिसरी दे घोल।
राम नाम में अद्भुत जादू, बंद नेत्र दे खोल।
राम नाम की धुन पर सारा,जगत रहा है डोल।
सारे संकट कट जाएंगे,राम नाम बस बोल।
उसको सबकुछ मिल जाता है,बिना दिए कुछ दाम।
राम नाम का सुमिरन करके,जो करता नित काम।।
कृपासिन्धु जग पालनहारी,हर लेते हर पीर।
सदा सहायक साधक होते,दशरथ सुत रघुबीर।
रघुनंदन के जैसा जग में, नहीं अन्य है वीर।
सत्य सनातन का संवाहक,धीर-वीर गंभीर।
दुख का साया कभी न पड़ता,उस सेवक के धाम।
राम नाम का सुमिरन करके,जो करता नित काम।।
दीन-हीन अबला नारी का, करते हैं उद्धार।
बीच भँवर में डूबी नौका,तुरत लगाते पार।
दर्शन देकर निज भक्तों का, करें स्वप्न साकार।
सत्य सनातन सतचित सुखमय,सकल जगत आधार।
मस्ती में सारा दिन बीते , सतरंगी हो शाम।
राम नाम का सुमिरन करके,जो करता नित काम।।
जिनके प्रताप से सागर में,पाहन जाते तैर।
शिला नारि पल में बन जाती, छूते ही बस पैर।
सकल वंश मिट गया दशानन, प्रभु से करके बैर।
भव सिन्धु नहीं तरता कोई, प्रभु की कृपा बगैर।
धन दौलत की कमी न रहती,होता जग में नाम।
राम नाम का सुमिरन करके, जो करता नित काम।।
राम नाम जो हर पल रटता , रहे भक्ति में लीन।
स्वस्थ निरोगी काया रहती,मन होता न मलीन।
धन दौलत से घर भर जाता,कभी न रहता दीन।
राम नाम की सुबह शाम जो,रोज बजाता बीन।
बड़े मजे से अपने घर में,वह करता आराम।
राम नाम का सुमिरन करके,जो करता नित काम।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)