*सरस्वती वंदना*
सरस्वती वंदना
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
दर्शन की आस लगाये बैठे हैं।
ममतामयी मांँ सरस्वती
भक्त तेरे दर्शन को तरसे हैं ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
भटक गये हैं राह से हम
पथ है मांँ अनजान ।
तुम बिन मांँ इस जग में अब
कैसे हो पहचान ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
शरण में अपनी ले लो मांँ तुम
भटक -भटक कर हूंँ परेशान ।
ज्ञान की ज्योति हृदय में जला दो
ज्ञान बिना नहीं मिलता मान।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
साहित्य सृजन की कला सिखा दो
करते मां तेरा ध्यान ।
मन में आकर मांँ विराजो
हरपल करें तेरा ध्यान ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश