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19 Nov 2025 · 1 min read

*सरस्वती वंदना*

सरस्वती वंदना

ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ
दर्शन की आस लगाये बैठे हैं।
ममतामयी मांँ सरस्वती
भक्त तेरे दर्शन को तरसे हैं ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ

भटक गये हैं राह से हम
पथ है मांँ अनजान ।
तुम बिन मांँ इस जग में अब
कैसे हो पहचान ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ

शरण में अपनी ले लो मांँ तुम
भटक -भटक कर हूंँ परेशान ।
ज्ञान की ज्योति हृदय में जला दो
ज्ञान बिना नहीं मिलता मान।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ

साहित्य सृजन की कला सिखा दो
करते मां तेरा ध्यान ।
मन में आकर मांँ विराजो
हरपल करें तेरा ध्यान ।
ज्ञान की मूरत करूणामयी मांँ

मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर
उत्तर प्रदेश

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