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19 Nov 2025 · 1 min read

#तेवरी..

#तेवरी..
भगवान मान लूं क्या??
(प्रणय प्रभात)
* हो बात स्वार्थ से प्रेरित वो, आह्वान मान लूं क्या?
मतलब में डूबे नारों को, यशगान मान लूं क्या?
* जो पला गर्भ में योनि मार्ग से, धरती पे आया।
सत्ता के कह देने भर से, भगवान मान लूं क्या??
* खारे पानी में डूब चुकी, इस नयन हवेली में।
सज धज के आते सपनों को, मेहमान मान लूं क्या??
*जो मन की आँखें उनमें अभी, उजाला काफी है।
इन अभिशापों को बतला दो, वरदान मान लूं क्या??
* मैं अंधड़ से अनभिज्ञ नहीं, बादल के कहने से।
मदमस्त हवा के झोंको को, तूफान मान लूं क्या??
* धृतराष्ट्र तनय गंधारी सुत, इतना सा समझा दो।
जो चक्रव्यूह रच रहा उसे, नादान मान लूं क्या??
* तिल्ली मेरे खेतों की है, गुड मेरी चरखी का।
दस बीस रेवड़ी के बदले, अहसान मान लूं क्या??
😞😞😞😞😞😞😞😞
संपादक
न्यूज़&व्यूज
श्योपुर (मप्र)

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