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19 Nov 2025 · 1 min read

मैं उन्हें भी दुआ देता हूँ

जो लोग मुझे ग़लत समझ बैठे,
शायद उनके नज़र के शीशे धुंधले थे।

मैं तो दिल से साफ़ था साहब ,
पर उनके अंदाज़ में कुछ फ़ासले थे।

मैं मुस्कुराता रहा, वो सवाल करते रहे,
मैं सच कहता रहा, वो ख़याल करते रहे।

कभी वक़्त बताएगा मेरा असली रंग,
क्योंकि सच को कितना भी छुपाओ—
वो एक दिन खुद ही उजाला कर देते हैं।

जिन्होंने मुझको गलत माना,
शायद अपना दर्द मुझ पर टाल देते हैं।
कोई बात नहीं—
मैं उन्हें भी दुआ देता हूँ,
क्योंकि गिरकर भी जो उठ जाए,
वही असली जीतेश कहता है।

हर बार मिलती सिख ने सिखाया मुझे ,
कभी जल्दी बहकाना नहीं हर बातों में,
लोगों की उम्मीदें कुछ नहीं होती है हमसे,

हसकर मिलना सिखाया जिसको,
लालच की उम्मीदें थी ।

पूरे नहीं होते हर ख़ाब जिन्दगी के ,
अधूरे उम्मीदों ने जीना सिखाया है,

जितेश भारती ✍🏻

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