बसा हुआ है अब तलक,सुधियों में वह गाँव।
बसा हुआ है अब तलक,सुधियों में वह गाँव।
बीत गया था बालपन,जिस बरगद की छाँव।।
डॉ.रागिनी स्वर्णकार शर्मा
बसा हुआ है अब तलक,सुधियों में वह गाँव।
बीत गया था बालपन,जिस बरगद की छाँव।।
डॉ.रागिनी स्वर्णकार शर्मा