जिक्र मेरा हुआ तो फिजाएं महक सी गई अपनों ने मुस्कुरा कर सजदा
जिक्र मेरा हुआ तो फिजाएं महक सी गई अपनों ने मुस्कुरा कर सजदा किया तो
जिंदगी में जन्नत बिखर सी गई…..
क्या शिकवा करें तुझसे ऐ जिंदगी !
तेरे बिना जिंदगी जिंदगी भी तो नहीं।
हरमिंदर कौर, अमरोहा (यूपी)