Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
18 Nov 2025 · 1 min read

*दूर ॲंधेरा निश्चित होगा, नई भोर है आने को (हिंदी गजल)*

दूर ॲंधेरा निश्चित होगा, नई भोर है आने को (हिंदी गजल)
———————————————
1)
दूर ॲंधेरा निश्चित होगा, नई भोर है आने को
चलो तपस्या करते हैं सब, भागीरथी बुलाने को
2)
सोच रहे हैं जो भारत में, ध्वस्त व्यवस्था कर देंगे
उनसे कह दो खड़ा देश है, भारत की जय गाने को
3)
जन्मजात जो भेदभाव हैं, ऊॅंच-नीच की खाई है
मन अनुकूल बनाना होगा, सबको उन्हें भुलाने को
4)
आएगी तकनीक निकलकर, नए दौर में नई-नई
हम तैयार रहें हर क्षण ही, नूतन को अपनाने को
5)
जो भी काम करें हम सोचें, क्या उनका हित सधता है
अब तक जिनके पास नहीं है, अच्छा खाना खाने को
6)
लोकतंत्र का अर्थ नहीं है, उच्छ्रंखलता-मनमानी
धैर्य नहीं खोते हैं इसमें, हम सरकार गिराने को
——————————————
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज) रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451

Loading...