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18 Nov 2025 · 1 min read

दोहा सप्तक. . . विविध

दोहा सप्तक. . . विविध

जीवन के हर मोड़ पर, सिर्फ भीड़ ही भीड़ ।
मिटें जहाँ बैचेनियाँ, मिला नहीं वह नीड़ ।।

बैचैनी है हर तरफ, जाने क्या है बात ।
क्या जीवन में चैन का, होगा कभो प्रभात ।।

माना होता धन बिना , कभी न कोई काम ।
निर्विवाद यह सत्य पर, यह छीने आराम ।।

धन लोलुप संसार में, समझे जीवन अर्थ ।
प्रेम सत्य संसार का, बाकी सब है व्यर्थ ।।

आपस में किस बात की, मन में रखते डाह ।
क्यों रिश्तों में जीत की, हरदम रहती चाह ।।

आपस की नाराजगी , मन करती बैचैन ।
आँसू से बोझिल सदा, रहते ये दो नैन ।।

अर्थ अश्व पर बैठ कर , करता बड़ा गुरूर ।
दया धर्म को भूलता, मद में रहता चूर ।।

सुशील सरना / 18-11-25

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