राम-भक्त हनुमंत है, जैसे कोई संत।
राम-भक्त हनुमंत है, जैसे कोई संत।
चित में जिसके राम है, विक्रम भरा अनंत।।
महाकाल के अंश का, हर युग में पहचान।
चिरंजीव का है मिला, सीता से वरदान।।
राम दूत कह राम से, मैं भी उनका भक्त।
फिर क्यों रहता मन भला, माया में आसक्त।।
बजरंगी कर दो कृपा, तेरा भी मैं दास।
राम कृपा भी मिल सके, रख लो अपने पास।।
“पाठक” आया है शरण, कृपा करो हनुमान।
कर पाऊँ सद्कर्म नित, बिना किसी व्यवधान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)