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18 Nov 2025 · 1 min read

कुण्डलिया छंद !

!! श्रीं !!
सुप्रभात !
जय श्री राधेकृष्ण !
शुभ हो आज का दिन !
🙏
अविरल चलती लेखनी, लिखे नवल अध्याय ।
शक्ति लेखनी में भरी , करती पल में न्याय ।
करती पल में न्याय, यही तकदीर बनाती ।
शब्द अमिट हो जाँय, लेखनी जो लिख जाती ।।
‘ज्योति’ लेखनी थाम, सत्य ही लिखना हर पल ।
करे शारदा कृपा, लेखनी चलती अविरल ।।
०००
महेश जैन ‘ज्योति’,
मथुरा !
🌷🌷🌷

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