जैसे कि अब तक रहे हम अकेले
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले, जी लेंगे कल भी तेरे बिना।
अच्छी नहीं हमसे यह बेवफ़ाई, रह लेंगे हम तो सच तेरे बिना।।
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले——————-।।
कुछ भी नहीं हमको तुमसे शिकायत, अफसोस हमको यह हो रहा है।
हमने किया है जिस पर यकीन बहुत, वह दूर हमसे क्यों ऐसे हो रहा है।।
गुजारा है अब तक जैसे वक़्त हमने, बिता लेंगे दिन हम तो तेरे बिना।
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले——————–।।
अब साथी तुमने जो यह बनाया है, आँखों में जिसका चेहरा बसाया है।
कितना है तुमको इस पर भरोसा, हमको तो तुमने शातिर बताया है।।
जैसे कि अब तक रहे हम मौजी, हँस लेंगे कल भी हम तेरे बिना।
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले——————-।।
हमसे तो ज्यादा तुमको कौन प्यार करेगा, यह भी तू भी कल देख लेना।
हमसे तो ज्यादा तुमको कौन खुशी देगा, कोशिश करके तू कल देख लेना।।
जैसे कि अब तक रहे हम परदेशी, सोच लेंगे कल भी यही तेरे बिना।
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले——————-।।
हमारे बिना तुम जी नहीं सकोगे, तड़पायेगी तुमको याद हमारी।
हमें याद करके तुम आँसू बहावोगे, होगी बेरौनक दुनिया तुम्हारी।।
बुलावोगे हमको कल तुम खत लिखकर, रह लेंगे खुश हम तेरे बिना।
जैसे कि अब तक रहे हम अकेले——————-।।
शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)