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17 Nov 2025 · 1 min read

मेरा कौन?

मेरे अलावा मेरा कौन?
तेरे अलावा तेरा कौन?

बस मुसाफ़िर हूँ,
रास्तों की राही हूँ…..
मिलते–बिछड़ते इस जग में,
किसका कोई, कौन यहाँ?

रिश्ते–नाते नाम के सारे,
आया अकेला—जाना अकेला।
सब दावे धुएँ से लगते,
सच में कुछ भी अपना नहीं।

ये मेरा, ये मेरा”—कहते रहते,
पर किसका क्या है वास्तव में?
कागज़ पर नाम भले लिखे हों,
वास्तव में सब खाली–खाली है।

पर फिर भी दिल उम्मीद रखता,
किसी अपने की एक पुकार पर।
शायद कोई हो इस दुनिया में,
जो कह दे—
“तेरे अलावा… मेरा कौन?”

Goutam Shaw

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