बाल कविता - शरद ऋतु
बाल कविता – शरद ऋतु
शरद ऋतु का हुआ है आना
मौसम हुआ सुहाना ।
पक्षियों ने भी शुरू कर दिया
मीठे सुर में गाना ।
साँझ – सवेरे धूप सुहानी
सबको कितना भाती ।
पक्षियों की सुंदर बोली भी
मन को बहुत लुभाती ।
पंक्ति बनाकर बैठे हैं सब
अनुशासन में जैसे ।
साथ – साथ रहना सब मिलकर
बता रहे हों जैसे ।
प्रीति निभाना इनसे सीखो
सच्ची प्रीत निभाते ।
बच्चों को बचपन से ही यह
आत्मनिर्भर बनाते ।
मौसम कैसा भी हो लेकिन
कभी नहीं घबराते ।
हर मुश्किल में धैर्य धरते
और सफल हो जाते।
मौलिक सृजन
पूनम दीक्षित
कृष्णा विहार कॉलोनी
ज्वाला नगर रामपुर उ. प्र.