किस्मत स्वंय बनाना है..
अपनी किस्मत स्वंय ही बनाना है।
फर्क की लकीर तुम्हें ही मिटाना है॥
रोना ना अपने तकदीर पर,
ना ठहर बहानों के जाल में,
जो ख्वाब देखा तूने कभी,
तुम पूरा करो हर हाल में,
मिलेगें कांटे राह में बहुत मगर
उन्हें हौसलों से तुम्हें सुलझाना है।
फर्क की लकीर तुम्हें ही मिटाना है॥
तूफ़ानों से अब क्या डरना,
मंज़िल ही तेरा ठिकाना है,
जीवन नहीं है कागज कोई,
मेहनत से इसको सजाना है,
कभी न रुकना मुश्किलों में,
निज संघर्षों से दुनिया सजाना है।
फर्क की लकीर तुम्हें ही मिटाना है॥
कभी मान कभी अपमान
सदा मिलेगें इस जहां में,
कभी मिलन कभी बिछोह
लगा रहेगा इस जीवन में,
भरोसा श्रम का है भाग्य का नहीं,
अपनी कर्मों से दुनिया सजाना है।
फर्क की लकीर तुम्हें ही मिटाना है॥
कभी परवाह करना नहीं
दुनिया की बातों का कभी
झुकेगी दुनिया तेरे आगे,
हार से घबराना ना कभी
हर मुश्किल का हल होगा
जो ठान लिया वो कर दिखलाना है।
फर्क की लकीर तुम्हें ही मिटाना है॥
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