ज़िंदा रहना है तो अपने पास रखो
ज़िंदा रहना है तो अपने पास रखो
मौत के साये में भी आस रखो।
माना कि ज़मीं मयस्सर नहीं लेकिन
अपनी मुट्ठी में सारा आकाश रखो।
बहुत सुकून मिलता है इस तरह से
मन को कभी न उदास रखो।
दिल भरा है बहुत गम से तो क्या
अपने होंठों पर फिर भी हास रखो।
a m prahari