सवाल उठने चाहिए...
झूल गया फंदे पर मासूम-सा एक बच्चा कोई,
माना कि वो आपका अपना न था सगा कोई,
क्या मौन फिर भी इस समाज को रहना चाहिए?
सवाल उठने चाहिए।
क्यों घिर आई घटा हर ओर से आतंक की?
क्या कहीं हो रही तो न हमसे कोई अनदेखी?
कैसी है ये हलचल, इसे पहचाननी तो चाहिए,
सवाल उठने चाहिए।
एक विद्यार्थी ने मौत को ही क्यों लगा लिया गले?
क्यों ईश्वर समान गुरु पर उसने इतने आरोप जड़े?
क्या व्यवस्था की कमी पर हमें गौर न करना चाहिए?
सवाल तो उठने चाहिए।
मन में उठे सवालों का वह जवाब क्यों न खोज सका?
मौत को ही एकमात्र विकल्प उसने क्यों चुना?
क्या इस परिस्थिति की हमें विवेचना न करनी चाहिए?
सवाल उठने चाहिए।
द्वंद्व में फँसा वह लिख रहा था जब अपना अंतिम संदेश,
तब क्या था उसके जीवन का यही एकमात्र उद्देश्य?
क्या हमें उस कागज में छिपी उसकी वेदना न पढ़नी चाहिए?
सवाल तो उठने चाहिए।
घुट-घुटकर जी रहे बच्चों की व्यथा को सुनने वाला है कौन?
समझकर भी सबने न जाने क्यों धारण कर रखी है मौन?
क्या विद्या के मंदिर में पुजारियों की जांच न होनी चाहिए?
सवाल तो उठने चाहिए।
आखिर कब तक, बच्चे देते रहेंगे स्वयं का बलिदान,
जान देकर ही क्या उन्हें मिल पाएगा सम्मान?
क्या उनको बचाने की एक मुहिम न छेड़नी चाहिए?
सवाल तो उठने चाहिए।
हर बच्चे की होती है अपनी अलग पहचान
तुलना कर दूसरों से न आंकों उनका ज्ञान,
जिसने धकेला उसे कुंठाओं के भंवर में
क्या उसे सजा ना मिलनी चाहिए?
सवाल उठना चाहिए ।
दुखित हृदय से भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏