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17 Nov 2025 · 1 min read

हाथ शीश पर मेरे रख दो, करुणा करके हे गिरधारी।

हाथ शीश पर मेरे रख दो, करुणा करके हे गिरधारी।
मन व्यथित बहुत है कष्टों से,मम पीर हरो हे बनवारी।
करुणा करके करुणानिधान,काटो सब व्यवधान हमारे,
गीता का ज्ञान हमें दे दो,सारे जग के पालनहारी।।

स्वरचित रचना-राम जी तिवारी”राम”
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)

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