मिरा स्कूल, मेरा गांव और वो शाम लौटा दो,
मिरा स्कूल, मेरा गांव और वो शाम लौटा दो,
मेरे बचपन का झूला, पेड़ के वो आम लौटा दो,
रखो दौलत जहां की और ये सारी जमीं रख लो,
मुझे बारिश का पानी और मेरी नाव लौटा दो।
जियाफत भी मुकम्मल इस जुवा को अब नहीं भाती,
मुझे खेतों की इमली और खट्टे बेर लौटा दो।
बहुत पैसे बहुत से नोट अब अच्छे नहीं लगते,
मुझे बाबा के हाथों का वो इक सिक्का ही लौटा दो।
अभिषेक सोनी “अभिमुख”
ललितपुर, उत्तर–प्रदेश