लफ़्ज़ों का क़र्ज़ उतार देना चाहिए वक्त रहते,
लफ़्ज़ों का क़र्ज़ उतार देना चाहिए वक्त रहते,
वरना चुप्पी अक्सर रिश्तों की नींव हिला देती है।
लफ़्ज़ों का क़र्ज़ उतार देना चाहिए वक्त रहते,
वरना चुप्पी अक्सर रिश्तों की नींव हिला देती है।