उद्गार जबसे बोलने हैं लग गए मैंने कविता छोड़ दी।
उद्गार जबसे बोलने हैं लग गए मैंने कविता छोड़ दी।
पीड़ा से जब आँख़ें जलने लग गए मैंने कविता छोड़ दी।
जब गीत ने कृत्रिमता का रूप लेकर तालियों की राह ली,
और पुस्तक के भाव* पूछे जो गए, मैंने कविता छोड़ दी।
©ऋतुपर्ण