Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
16 Nov 2025 · 1 min read

#आज_की_भेंट

#आज_की_भेंट
विगत 13 नवंबर को मुक्तिबोध जन्मोत्सव में प्रथम भेंट के बाद आज 16 नवम्बर को जेल अधीक्षक श्री प्रभात कुमार का गृहवाटिका में आगमन दिवस के पूर्वार्द्ध को सार्थक व स्मरणीय बनाने वाला रहा। इस अवसर पर उनकी सुंदर सी कृति भी प्राप्त हुई, जिसे पढ़ने के बाद आपको भी अवगत कराऊंगा।
आत्मीय और पारिवारिक परिवेश में साहित्यिक और बौद्धिक चर्चा से आपकी बेबाकी, अध्ययनशीलता व रचनाधर्मिता का सहज अनुमान लगा। व्यावहारिक छद्मता से दूर एक व्यक्ति का व्यक्तित्व स्वत: स्पष्ट हो ही जाता है।
बंदीगृह के आंतरिक परिवेश से बंदीजनों के अंतर्मन तक में सुधार और अपेक्षित बदलाव की संभावनाओं को लेकर प्रयासरत आप प्रथम दृष्टया अपने दायित्वों के प्रति सजग प्रतीत हुए। मुक्तिबोध जी के जन्म स्थल को देखने व अतीत को जानने की ललक ने आपकी शोधात्मक वृत्ति का परिचय दिया। अच्छा लगा एक नया संपर्क और सकारात्मक संवाद, जो समय के साथ और प्रगाढ़ होना ही। आभार।।
#प्रणय_प्रभात

Loading...