श्रेष्ठता
यदि पुरुष श्रेष्ठ होता तो न गर्भ धार आता
होती श्रेष्ठ स्त्री यदि तो पुरुष काहे भाता
पुरुषों की विजय पर स्त्री उत्सव मनाए
स्त्री विजय पर पुरुष क्यों लजाए
यदि पुरुष श्रेष्ठ क्यों भय फिर सताए
कोई स्त्री जब प्रखर हो के आए
ये जो भय है ये झूठा दंभ पुरुष का
यही भय स्त्री में कारण घुटन का
स्त्री और पुरुष नर और मादा
नहीं कोई कम न कोई ज्यादा
लेकिन सभी का अपना है फायदा
कामुक पुरुष का भय होता ज्यादा
शिव और शक्ति पर्याय प्रकृति का
सृजन कामदेव संग शोभित रति का
श्रोत ज्ञान शिव तो प्रसार शक्ति
आत्म बोध चित्त प्रचार भक्ति