स्त्री संपूरक
न तुम श्रेष्ठ हो न हम न्यून हैं
तुम भी शून हो हम भी शून हैं
ये लड़ाई भिड़ाई किसने कहो
भावनाएं तो रही सदा मौन हैं
स्त्री पुरुष पूरक बने, दृष्टि में भी तो संपूरक बने
स्त्री से सजी अगर सृष्टि तो, स्त्री है संवाहक बने
पीढ़ियों की धरोहर संभाले यही लहरा के आंचल
ममता ही नहीं मां संस्कारों की भी तो संचालक बने