सूर्य उदित आकाश में, दे सबको संदेश।
सूर्य उदित आकाश में, दे सबको संदेश।
कर्मवीर बनना तुझे, हो कोई परिवेश।।
सूर्य रश्मियों ने कही, लो खुद से पहचान।
कर्म सतत करना यहाँ, विधि का बना विधान।।
सूर्य देव गुरु रूप में, देते सबको ज्ञान।
शिष्य श्रेष्ठ जिनके हुए, महावीर हनुमान।।
सूर्य देव की भक्ति से, होता है तन पुष्ट।
ब्रह्म रूप साक्षात है, करें नहीं नारुष्ट।।
सूर्य देव करिए कृपा, विनती “पाठक” मान।
कंचन काया का सदा, दे सुंदर वरदान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)