जग जाने दो
मुक्तक
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जग जाने दो खूब, चाहतें मन में अपने।
और देखिए नित्य, स्नेह के प्रियकर सपने।
जीवन का आनन्द, उठाएं खुले हृदय से।
हो जाएंगी दूर, राह की सभी अड़चने।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य
मुक्तक
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जग जाने दो खूब, चाहतें मन में अपने।
और देखिए नित्य, स्नेह के प्रियकर सपने।
जीवन का आनन्द, उठाएं खुले हृदय से।
हो जाएंगी दूर, राह की सभी अड़चने।
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-सुरेन्द्रपाल वैद्य