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15 Nov 2025 · 1 min read

व्यर्थ अर्थ प्रपंच ये ,

व्यर्थ अर्थ प्रपंच ये ,
मुझको नहीं पसंद ।
मन से अक्सर छीनते,
खुशियों का मकरंद ।।

सुशील सरना / 15-11-25

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