*भारत की वन्य विरासत*
भारत की वन्य विरासत
वन्य विरासत करती रक्षा, इसकी अलग पहचान है।
इसके कारण ही विश्व में, भारत का स्थान है।
पूरे विश्व में भारत है दसवें नंबर पर, एशिया में चौथा स्थान।
जर-जंगल
स्वाभिमान हमारा, इससे बढ़े मान-सम्मान ।
विभिन्न प्रकार के जीव-जन्तु हैं, पेड़-पौधे हैं सुन्दर-सुन्दर।
पर्यावरण और जलवायु को, सुन्दर रखते अन्दर-अन्दर।
भारत में पिचहत्तर हजार प्रकार के, वन्य जीव पाए हैं जाते।
छियालीस हजार पेड़ पौधों की, शुद्ध हवा हम खाते।
आज जलवायु परिवर्तन का संकट, पर्यावरण का है हृास।
बचाएंँगे इससे पेड़ पौधे ही, इन पर है केवल विश्वास।
आज पेड़-पौधों का कटाव, कर रहा हमको परेशान।
आज जीव- जन्तुओं को मार रहा, इंसान बना है हैवान।
मानव-मानव का दुश्मन हुआ, चुनौतियों का है दौर।
जिम्मेदार केवल हम दिखते, नहीं दिखता और।
घट रही वनों की संख्या, हो रहा जीवों का विनाश।
आज थक रहा हर आदमी, फूल रहा है सांस।
विलुप्त हो रहे पेड़-पौधे, विलुप्त हो रहे जीव।
वन हमारा आधार बना है, हिल रही है नींव।
वन सम्पदा को नहीं बचाया, होंगे सब निर्जीव।
बढ़ेगा प्रतिशत वन्य सम्पदा का, लगाओ पेड़ भरपूर।
करेंगे आज से वृक्षारोपण, सब कुछ मिले भरपूर।
बचाओ वन खुद बचो, कहता दुष्यन्त कुमार।
विश्व में वन्य सम्पदा है हमारी, पहचान और आधार।