किसका करें यकीन
किसका करें यकीन
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अपने ही जब हुए पराए, किसका करें यकीन।
गले लगाया दोस्त समझ कर, लिया चैन वो छीन।।
ढूँढ रहे थे हम तो बाहर, साँप छुपा आस्तीन।
अपनों से हीं हार गए हम, और बने हैं हीन।।
हमने ही था दिया सहारा, जिसे समझ कर दीन।
कभी वक्त पर काम न आया, किया बहुत गमगीन।।
दुनिया भर की रीति रही है, बातें नहीं नवीन।
कहता आया भाई_भाई, युद्ध लड़ा था चीन।।