यमलोक मंत्रालय का प्रस्ताव
यमलोक मंत्रालय का प्रस्ताव
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बिहार चुनाव परिणामों के बाद
मित्र यमराज पहुँच गये मोदी जी के पास,
बधाइयाँ दी, लड्डू खिलाया, माला पहनाया
और बिना देर किए यमलोक मंत्रालय का सुझाव दे दिया,
मोदी जी मुस्कराए, फिर फरमाए
महोदय! आपका प्रस्ताव सराहनीय
किंतु सरकार के लिए मुश्किलों का सबब है।
अभी तो अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए
नेता चिराग लेकर खोजना पड़ता है,
फिर यमलोक मंत्री भला हम कहाँ ढूँढ़ने जायेंगे ?
या किसी आत्मा को निर्यात कर यमलोक मंत्री बनाएंगे,
इसके बारे में भी आप कुछ बताएंगे, कोई नाम सुझाएंगे
जिसे इसके लिए सहर्ष तैयार भी कर पायेंगे।
या फिर ये जिम्मेदारी निभाने के लिए
खुद ही तैयार होकर आये हैं।
मोदी जी की बात सुन यमराज खुश हो कहने लगा,
आप मंत्रालय का ऐलान कीजिए
यमराज मित्र का नाम पहले यमलोक मंत्री के लिए
बिना हिचक घोषित कर दीजिए,
यथाशीघ्र शपथ दिलवाइए,
यमलोक मंत्रालय के लिए नया भवन बनवाइए
बिना टेंडर ये काम मुझसे मुफ्त करवाइए,
सरकारी धन भी बचाइए
उस धन को राष्ट्र के विकास में लगाइए।
यदि आप ऐसा करेंगे, तो इतिहास बनेगा
क्योंकि मेरा यार बिना किसी सुविधा सहूलियत के
मुफ्त में अपने मंत्रालय का काम करेगा,
कोई वेतन-भत्ता, आवास या वाहन भी नहीं लेगा
बिना स्टाफ के सब कुछ अकेले काम करेगा
यथा संभव कानून व्यवस्था में भी
अपना स्वैच्छिक सहयोग देगा,
पर कानून व्यवस्था को बिल्कुल बिगड़ने नहीं देगा।
अब आप सोचिए कि क्या करना है
यमलोक मंत्रालय बनाना है या मेरी नाक कटवाना है,
बहाना बना कर मुझे धीरे से टरकाना है,
और मेरे यार को सदमा पहुँचाकर
एक सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव को कूड़ेदान में पहुँचाना है।
सुधीर श्रीवास्तव