छोड़कर दुनियादारी की फ़िक्र,
छोड़कर दुनियादारी की फ़िक्र,
कभी मेरे लिए भी मुस्कुरा दिया करो…
थक जाती है रूह मेरी भी कभी–कभी,
अपने होने का एहसास दिला दिया करो।
छोड़कर दुनियादारी की फ़िक्र,
कभी मेरे लिए भी मुस्कुरा दिया करो…
थक जाती है रूह मेरी भी कभी–कभी,
अपने होने का एहसास दिला दिया करो।