कहानी
तुम सब
बस किरदार थे
मेरे जीवन की कहानी के
कहानी आगे बढ़ती रही
तुम सब अपने
वास्तविक स्वरूप से
परिचित कराते हुए
अपने किरदार से
विरमित होते रहे
जीवन की कहानी थी ना
कहानी को खत्म तो होना ही था
कहानी समाप्त होने के पहले
कुछ किरदारों को
अपने जीवन का
त्याग करना ही पड़ता है
तुम सबने भी वही किया
दुःखी मत हो
कहानी का पटाक्षेप तो
होता ही है
समय खुद को परिवर्द्धित करता है
जीवन की कहानी के साथ-साथ
और हाँ
परिमार्जित भी।
-अनिल मिश्र