वंदन प्रातः ईश का, करता दिशा प्रदान।
वंदन प्रातः ईश का, करता दिशा प्रदान।
जिससे दिन का कर्म हो, सहज बिना व्यवधान।।
आदिशक्ति माता हमें, दो ऐसा वरदान।
जीवन यह भयमुक्त हो, दूर रहे अभिमान।।
ईश्वर की आराधना, देता है नित ज्ञान।
प्रखर करे शुभ भावना, सफल सभी अभियान।।
माया मोहित हम सभी, बने हुए नादान।
क्षमा करो प्रभु दोष सब, तुम हो कृपा निधान।।
दे दो “पाठक” को शरण, छोटा बालक मान।
तेरी भी जय कर सकूँ, बनकर एक सुजान।।
:- राम किशोर पाठक (शिक्षक/कवि)