कवि शाज़ ✍️
कवि शाज़ ✍️
गंगा के घाट से उठती है एक साँस,
जो पहाड़ों के सीने में उतर जाती है,
वही साहिबगंज है —
जहाँ हर पत्थर में सदियों की कहानी बस जाती है।
कवि शाज़ ✍️
गंगा के घाट से उठती है एक साँस,
जो पहाड़ों के सीने में उतर जाती है,
वही साहिबगंज है —
जहाँ हर पत्थर में सदियों की कहानी बस जाती है।