यहाँ के जंगलों में अब भी सिदो-कान्हू की पुकार गूँजती है,जहाँ
यहाँ के जंगलों में अब भी सिदो-कान्हू की पुकार गूँजती है,जहाँ विद्रोह नहीं आग जली थी आज़ादी की पहली लौ बनकर।
मेरा ___साहेबगंज
यहाँ के जंगलों में अब भी सिदो-कान्हू की पुकार गूँजती है,जहाँ विद्रोह नहीं आग जली थी आज़ादी की पहली लौ बनकर।
मेरा ___साहेबगंज